Questionnaire of National Consultation for New Education Policy'.Kindly response to e-mail rusa.he.2013[at]gmail.com


उच्च शिक्षा किसी भी क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास का एक महत्वपूर्ण दर्पण है। मानवीय संसाधनों  के सर्वागीण विकास में उच्च शिक्षा की अहम् भूमिका है। भारतीय उच्च  शिक्षा व्यवस्था को अमेरिका व चीन के पश्चात  विश्व   में तीसरी सबसे बड़ी व्यवस्था होने का गौरव प्राप्त है।  राष्ट्रीय विकास में ‘ ज्ञान व शोध ’ के महत्व दृष्टिगत रखते केन्द्र तथा राज्य  सरकारों द्धारा  उच्च शिक्षा के विकास के लिए  अनेक  प्रयास किये जा रहें है। 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा के संवैधानिक अधिकार, युवा वर्ग की  बढ़ती हुई जनसंख्या, शिक्षा  के  विस्तार  के एवं व्यवसायिकरण  तथा निजी क्षेत्र  की बढ़ती हुई रुचि ने उच्च शिक्षा के सम्मुख अभूतपूर्व अवसर व चुनौतिया  उत्पन्न कर दी हैं। एक ओर उच्च शिक्षा में प्रवेश की भारी मांग  है, वहीं दूसरी ओर, शिक्षित बेरोजगारों की संख्या चितंनीय दर से बढ़ रही है।   उत्तराखण्ड  राज्य की स्थापना के  पश्चात 12 वर्ष की अल्पावधि में संख्यात्मक दृष्टि से प्रदेश में उच्च शिक्षा का द्रुतगति से विकास हुआ है। इस अवधि में 19 विश्वविद्यालयों, 36 राज्य  महाविद्यालयों तथा अनेक निजी शिक्षण संस्थानों  की स्थापना हुई है। राष्ट्रीय उच्च शिक्षा नीति (1986) के अनुरुप ही उत्तराखण्ड में भी उच्च शिक्षा के विकास में  गुणवत्ता (Quality ),  पहुंच (Accessibility ),    समता (Equity), अनुरुपता (Relevance ) तथा सुशासन (Good Governance ) को  सर्वोच्च प्राथमिकता  प्रदान की  गई हैं ।